Hello friends this is me Jagriti Srivastava
Here is my new poem if you like it please share it as much as you can and
Thanks for the love and support.
क्यों गुमसुम हो ?
नाराजगी हमसे है या खफा खुद से हो
दूर हमसे हो या जुदा खुद से हो
इन बेचैन सी आंखों मे तुम क्या छुपाए बैठे हो
नजरें मिलानी हैं हमे और तुम आंखें झुकाए बैठे हो
ताल्लुक बनाना है तुमसे और तुम फासलेें बढ़ा रहे हो
खोना है हमको तुममें और तुम इस भीड़ में खोये जा रहे हो
क्यों सजा दे रहे हो इस कदर अपने आप को
कब तक छुपा सकते हो दिल में दबी इस बात को
हो अजनबी अगर तुम, क्यों याद आ रहे हो
दस्तूर इस जमाने का कैसे निभा रहे हो
करते दुआ यही है कि चैन तुमको आए
खुदा की मर्जीयो को तुम कभी जो समझ पाए
ना रूठना तुम हमसे ना खफा खुद से होना
चेहरे की मुस्कुराहट बरकरार ऐसे रखना
जीवन भर तुम दिल में बस प्यार ऐसे रखना |
Jagriti Srivastava
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