अकेलापन डरावना नहीं होता, अगर हम उसे समझें।
एकांत में मन की आवाज़ सबसे स्पष्ट सुनाई देती है।
ये समय होता है खुद से मिलने का, खुद को समझने का।
भागती दुनिया से कुछ पल चुराकर, जब हम खुद के साथ बैठते हैं,
तभी असली शांति का अनुभव होता है।
अकेलापन हमें डराता है, क्योंकि हमने हमेशा बाहर की दुनिया को प्राथमिकता दी है।
पर कभी उस मौन को सुनिए, जो भीतर गूंजता है –
वह आपकी अधूरी बातों, अनकहे सपनों और दबे हुए जज़्बातों की पुकार है।
जब हम खुद के साथ समय बिताते हैं,
तो हमें दूसरों से नहीं, अपने आप से प्यार करना आता है।
यह सफर बाहर से भीतर की ओर होता है –
जहाँ शोर नहीं होता, पर जवाब जरूर मिलते हैं।
अकेलापन कोई खालीपन नहीं,
बल्कि आत्मा की सबसे गहराई से मुलाक़ात है।
और जब हम खुद को समझ लेते हैं,
तो दुनिया को समझना थोड़ा आसान हो जाता है।
Jagriti Srivastava
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