जमाने में गम और भी कई है इश्क़ के अलावा भी
फिर क्यों प्यार करके यूं दिल को अपने दुखाया जाए
मौसम कई आते है मुस्कुराने के
तो क्यों ना बदलते मौसमो के साथ मुस्कुराया जाए
तरीके तो और भी कई है दर्द मिटाने के
फिर क्यों हार कर यूं मैखाने की तरफ़ जाया जाए
ऐसा करे कि चंद पानी कि बूंदो से ही
अंदर लगी इस आग को मिटाया जाए
बुराइयां तो खुद में भी लाखो भरी है
फिर क्यों किसी और को गुनाहगार बनाया जाए
खुदा को छोड़कर उपर ही
क्यों ना इंसान बनकर ही दिखाया जाए
तोड़ना तो तूफान का काम होता है
क्यों ना किसी के जुड़ने का जरिया बन जाया जाए
तो फिर छितिज बनकर ही
क्यों ना जमीन और आसमान को मिलाया जाए
कामयाबी पर तो खुश सभी होते हैं
क्यों ना अब बर्बादियो का जश्न मनाया जाय
कोई सो सके चैन कि नींद
इसके लिए अपनी कुछ राते क्यों ना जाग कर ही बिताया जाए ।
Jagriti Srivastava
Sunday, 5 May 2019
क्यों ना
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