Saturday, 11 May 2019

Love you Maa

I love you mom – not just because you are my mother, but because there is no one else in the world who understands me better.
I fight with you every now and then, I keep arguing again and again. But deep down inside I hope that your heart knows, that my love for you will forever grow
The size of my love for you knows no bounds. You’re the only person in the world who knows what my heart sounds like from inside me.
Maa, thanks for not just being proud of my strengths but also never being ashamed of my weaknesses. Love ya.



सब मुझे पहचानते हैं पर वो मुझे जानती है
प्यार मुझे सब करते हैं पर वो दुलारती है
गुस्सा तो सभी होते हैं पर वो मुझे डांटती है
खाने को तो सभी पूछते हैं  पर वो अपने हाथो से खिलाती है
मौत तो आनी ही है एक दिन  पर वो हमें जीना सिखाती है
वो मां ही है जो हर कदम पर साथ निभाती है
कितना भी रूठ लो वो अगले पल, मनाने खुद ही चली
आती है
खाना तुम ना खाओ तो भूखे पेट वो भी सो जाती है
वो मां ही है जो हर कदम पर साथ निभाती है
  गलती पर जोर से चिल्लाती है  
  पर हमारी खुशियों के लिए सारी दुनिया से वो लड़ जाती है
  कामयाबी पर हमारे जश्न वहीं मनाती है
  टूट कर हम बिखरते हैं पर हमसे ज्यादा आंसू वही बहाती है
वो मां ही है जो हर कदम पर साथ निभाती है
मेरे गुनाहों को चुटकी में माफ किए जाती है
  हर बात पर मुझे सीने से वो लगाती है
  वो मां ही है जो हर कदम पर साथ निभाती है
                        जागृति श्रीवास्तव
 

Sunday, 5 May 2019

क्यों ना

जमाने में गम और भी कई है इश्क़ के अलावा भी
फिर क्यों प्यार करके यूं दिल को अपने दुखाया जाए
मौसम कई आते है मुस्कुराने के
तो क्यों ना बदलते मौसमो के साथ मुस्कुराया जाए
तरीके तो और भी कई है दर्द मिटाने के
फिर क्यों हार कर यूं मैखाने की तरफ़ जाया जाए
ऐसा करे कि चंद पानी कि बूंदो से ही
              अंदर लगी इस आग को मिटाया जाए
बुराइयां तो खुद में भी लाखो भरी है
  फिर क्यों किसी और को गुनाहगार बनाया जाए
  खुदा को छोड़कर उपर ही
              क्यों ना इंसान बनकर ही दिखाया जाए    
           तोड़ना तो तूफान का काम होता है
      क्यों ना किसी के जुड़ने का जरिया बन जाया जाए
   तो फिर छितिज बनकर ही
क्यों ना जमीन और आसमान को मिलाया जाए     
कामयाबी पर तो खुश सभी होते हैं
क्यों ना अब बर्बादियो का जश्न मनाया जाय
कोई सो सके चैन कि नींद
इसके लिए अपनी कुछ राते क्यों ना जाग कर ही बिताया जाए ।
           
                   Jagriti Srivastava
                                                    
                              
                              

अकेलापन

अकेलापन डरावना नहीं होता, अगर हम उसे समझें। एकांत में मन की आवाज़ सबसे स्पष्ट सुनाई देती है। ये समय होता है खुद से मिलने का, खुद...