दिल की इस कशमकश को सुलझाएं कैसे
जो हमें मिल नहीं सकता उसे भूल जाए कैसे
कि कितनी शिद्दत से आरजू थी उसे पाने की
इतने लंबे सफर के बाद उसे रास्ते में छोड़ जाए कैसे
दोषी हम हैं या समय ने बना दिया है
इस सच्चाई को हम किसी को बतलाएं कैसे
कि सब समझते हैं गुनहगार हमें अब
कि हर किसी को अपना हाल-ए-दिल सुनाएं कैसे
ना चाहते हुए उठाए थे जो कदम
उन कदमों को पीछे अब हटाये कैसे
कि ख्वाहिश नहीं है मरने की पर
इस तरह से हम जिये जाए कैसे
परवाह नहीं लोग पसंद करते हैं या नहीं
पर जो हमें पसंद है उसे पसंद आए कैसे
Jagriti Srivastava
Sunday, 9 September 2018
आखिर कैसे
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
अकेलापन
अकेलापन डरावना नहीं होता, अगर हम उसे समझें। एकांत में मन की आवाज़ सबसे स्पष्ट सुनाई देती है। ये समय होता है खुद से मिलने का, खुद...
-
Why I Stopped Writing… and Why I’m Coming Back There was a time when I used to write from my heart — freely, without fear. Words used to ...
-
So today's topic of my blog is CLEANLINESS There are lot of reason why i choose this topic but one of them is that i am a Nature lover ...
-
हमारे देश में इस समय चुनावी माहौल चल रहा है। हर तरफ सिर्फ इसी बात की चर्चा हो रही है तो मैंने भी सोचा कि इस मुद्दे पर थोड़ा प्रकाश डाला जाए ...
No comments:
Post a Comment