Sunday, 9 September 2018

आखिर कैसे

दिल की इस कशमकश को सुलझाएं कैसे
जो हमें मिल नहीं सकता उसे भूल जाए कैसे
कि कितनी शिद्दत से आरजू थी उसे पाने की
इतने लंबे सफर के बाद उसे रास्ते में छोड़ जाए कैसे
दोषी हम हैं या समय ने बना दिया है
इस सच्चाई को हम किसी को बतलाएं कैसे
कि सब समझते हैं गुनहगार हमें अब
कि हर किसी को अपना हाल-ए-दिल सुनाएं कैसे
ना चाहते हुए उठाए थे जो कदम
उन कदमों को पीछे अब हटाये कैसे
कि ख्वाहिश नहीं है मरने की पर
इस तरह से हम जिये जाए कैसे
परवाह नहीं लोग पसंद करते हैं या नहीं
पर जो हमें पसंद है उसे पसंद आए कैसे
                             Jagriti Srivastava

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