दिल की इस कशमकश को सुलझाएं कैसे
जो हमें मिल नहीं सकता उसे भूल जाए कैसे
कि कितनी शिद्दत से आरजू थी उसे पाने की
इतने लंबे सफर के बाद उसे रास्ते में छोड़ जाए कैसे
दोषी हम हैं या समय ने बना दिया है
इस सच्चाई को हम किसी को बतलाएं कैसे
कि सब समझते हैं गुनहगार हमें अब
कि हर किसी को अपना हाल-ए-दिल सुनाएं कैसे
ना चाहते हुए उठाए थे जो कदम
उन कदमों को पीछे अब हटाये कैसे
कि ख्वाहिश नहीं है मरने की पर
इस तरह से हम जिये जाए कैसे
परवाह नहीं लोग पसंद करते हैं या नहीं
पर जो हमें पसंद है उसे पसंद आए कैसे
Jagriti Srivastava
Sunday, 9 September 2018
आखिर कैसे
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अकेलापन
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